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Showing posts from October, 2021

करवा चौथ

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        सुहागिनों का पर्व करवा चौथ  सुहागिनों का सबसे बड़ा पर्व होता है करवा चौथ। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, वैवाहिक जीवन और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला करवा चौथ व्रत रखती हैं।  महिलाएं रात को चांद दर्शन और पूजा के बाद व्रत तोड़ती हैं। मान्यता है कि चंद्र दर्शन और चांद को अर्घ्य देने से पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।  करवा चौथ का व्रत सूर्योदय के साथ शुरू होता है और चंद्रोदय पर खत्‍म होता है। इस दिन सुहागिन औरतें पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं और अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। वहीं आजकल कई कुंवारी लड़कियां मनचाहे वर के लिए ये व्रत रखती हैं। इस दिन माताा करवा और गौरी मां की पूजा की जाती है। तो क्‍या है पूजा के नियम, शुभ मुहूर्त, इससे संबंधित मान्‍यताएं आइए जानते हैं। करवा चौथ पर्व का महत्त्व हिन्दू धर्म में करवा चौथ पर्व का विशेष महत्त्व है। इस दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत से पति-पत्नी ...

शरद पूर्णिमा

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                  शरद पूर्णिमा  यूं तो हर पूर्णिमा का हिंदू धर्म में महत्व होता है, लेकिन शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है।  हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। इस व्रत को आश्विन पूर्णिमा, कोजगारी पूर्णिमा और कौमुदी व्रत के नाम से भी जानते हैं। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इसे अमृत काल भी कहा जाता है। कहते हैं कि इस दिन महालक्ष्मी का जन्म हुआ था। मां लक्ष्मी समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुई थीं।  कहते हैं कि इस दिन महालक्ष्मी का जन्म हुआ था। मां लक्ष्मी समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुई थीं। पुराणों के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ गरूड़ पर बैठकर पृथ्वी लोक में भ्रमण के लिए आती हैं। इतना ही नहीं इस दिन मां लक्ष्मी घर-घर जाकर भक्तों पर कृपा बरसाती हैं और वरदान देती हैं। पुराणों के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ गरूड़ पर बैठकर पृथ्वी लोक में भ्रमण के लिए आती हैं। इतना ही नहीं इस दिन मां लक्ष्मी घर-घर...

दशहरा

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  असत्य पर सत्य की जीत का पर्व .                             दशहरा   दशहरा का त्योहार असत्य पर सत्य ओर बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाते हैं। इस दिन देशभर में रावण दहन का आयोजन होता है। रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। लंका के राजा रावण को हम बुराई का प्रतीक मानते हैं, उसके जीवन सॆ जुड़ी ऐसी कई बाते हैं जिसके बारे में जानना काफी रोचक है।   दशानन  रावण कहा जाता है कि रावण के 10 सिर थे, हर सिर के अलग अलग ​अ​र्थ थे।  रावण को दशानन भी कहा जाता है दशानन का अर्थ है- जिसके 10 सिर हों। कहा जाता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने वर्षों तक कठोर तप किया लेकिन भगवान शिव प्रसन्न नहीं हुए। इसके बाद रावण ने भगवान शिव को अपना सिर अर्पित करने का निर्णय लिया। भगवान शिव की भक्ति में लीन रावण ने अपना सिर काटकर भोलेनाथ को अर्पित कर दिया, लेकिन उसकी मृत्यु नहीं हुई। उसकी जगह दूसरा सिर आ गया। ऐसे एक-एक करके रावण ने अपने 9 सिर भगवान शिव को ​अर्पित कर दिए। जब 10वीं बार उसने...

नवरात्रि

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                          जय माता दी।। ज    -  - - जब भी कोई माँ के दर पर जाता है,   य - -  - यम के भय से मुक्त हो जाता है ,   मा - - - माँ तू ही कष्ट निवारिणी है , ता - - - तारण हारिणी तू है,तु ही बिगड़ी बनाती  दी - - - दिया है तूने सब कुछ बिन मांगे माँ।।    नवरात्रि का महत्व हिंदू धर्म में नवरात्रि एक साल में चार बार आते हैं लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है. ​हिंदू नववर्षक की शुरुआत चैत्र नवरात्रि से मानी जाती है. वहीं शारदीय नवरात्रि का भी अलग महत्व है. कहा जाता है कि शारदीय नवरात्रि धर्म की अधर्म पर और सत्य की असत्य पर जीत का प्रतीक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्हीं नौ दिनों में मां दुर्गा धरती पर आती है और धरती को उनका मायका कहा जाता है. उनके आने की खुशी में इन दिनों को दुर्गा उत्सव के तौर पर देशभर में धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है. श्रध्दालु पहले दिन कलश स्थापना कर इन नौ दिनों तक व्रत-उपवास करते हैं.! नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग ...